Thursday, November 22, 2018

मुंशी प्रेमचंद की जीवनी - Munshi Premchand biography In Hindi

  अभिमन्‍यु भारद्वाज       Thursday, November 22, 2018
हिन्‍दी और उर्दू के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद( Munshi Premchand) का जन्‍म 31 जुलाई सन् 1880 में उत्‍तर प्रदेश के वाराणसी जिला के निकट लमही नामक गाँव में हुआ था। उनका जन्‍म अजायबराय और आनन्‍दी देवी के यहाँ हुआ था। वह अपने माता-पिता की चौथी संतान थे। मुंशी प्रेमचंद( Munshi Premchand) का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था लेकिन उन्हें नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद( Munshi Premchand) के नाम से भी जानते है तो आइये जानते है - मुंशी प्रेमचंद की जीवनी - Munshi Premchand biography In Hindi 

मुंशी प्रेमचंद की जीवनी -  Munshi Premchand biography In Hindi

मुंशी प्रेमचंद की जीवनी - Munshi Premchand biography In Hindi

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बचपन और प्रारंभिक शिक्षा (Childhood And Early Education)

मुंशी प्रेमचंद( Munshi Premchand) के  चाचा उन्‍हें नबाव कह कर पुकारते थे। मुंशी जी ने उर्दू और फारसी में अपनी प्रांरभिक शिक्षा लालपुर के मदरसा से प्राप्‍त की थी तथा बाद में उन्‍होंने एक मिशनरी स्‍कूल से अंग्रेजी की शिक्षा भी प्राप्‍त की। बचपन में ही प्रेमचंद की मां की मृत्‍यु हो गई तत्‍पश्‍चात ही उनके पिता ने दूसरा विवाह कर लिया, लेकिन दूसरी मां के साथ प्रेमचंद के संबंध अच्‍छे नहीं थे। कुछ दिनों बाद पिता का निधन हो गया तथा प्रेमचंद को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। 

 उपन्‍यास लेखन (Novel writing)

उनको बहराइच के एक सरकारी स्‍कूल में शिक्षक के पद का प्रस्‍ताव मिला था यह भी कहा जाता है कि इसी समय से उन्‍होंने उपन्‍यास लिखना शुरू कर दिया था। सन् 1910 तथा 1914 के मध्‍य तक प्रेमचंद उर्दू एवं हिंदी के प्रख्‍यात लेखक बन चुके थे तथा वर्ष 1916 में उन्‍होंने गोरखपुर के सामान्‍य हाईस्‍कूल में सहायक अध्‍यापक की नौकरी की। 1919 में प्रकाशित ‘सेवा सदन’ उनका पहला प्रमुख हिंदी उपन्‍यास है।वर्ष 1919 में असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर प्रेमचंद ने सहायक अध्‍यापक के पद से इस्‍तीफा दे दिया और बनारस जाकर साहित्‍य को ही अपने जीवन का आधार बना लिया। सन् 1923 में प्रेमचंद ने ‘सरस्‍वती प्रेस’ की स्‍थापना की और 1930 में एक राजनीतिक साप्‍ताहिक पत्रिका ‘हंस’ का संपादन किया। कुछ दिन उन्‍होंने मुंबई के एक प्रोडक्‍शन हाउस अजंता सिनेटोन में पटकथा लेखक के रूप में कार्य किया। मजबूर फिल्‍म की कहानी प्रेमचंद के द्वारा की लिखी गई थी। कहा यह भी जाता है कि प्रेमचंद की कलम पर स्‍वंय सरस्‍वती जी विराजमान रहती थीं। प्रेमचंद जी एक संवेदनशील लेखक, कुशल वक्‍ता, दूरदर्शी सोच और समाज के प्रति कुछ अलग लिखने तथा अच्‍छा संदेश देने वाले लेखक थे उन्‍हें उपन्‍यास का महानायक कहा जाता है। बंगाल के प्रसिद्ध उपन्‍यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्‍याय ने उन्‍हें उपन्‍यास सम्राट की उपाधि से नवाजा और उपन्‍यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद के नाटक, आत्‍मकथा, कहानी आज भी देश और समाज को एक बहुत अच्‍छा संदेश देने का काम करते हैं। उनकी अंतिम कृतियां कफन और गोदान हैं।

 मुंशी प्रेमचंद की मृत्यु (Munshi Premchand's death)

प्रेमचंद आधुनिक काल के एक महान लेखकों में से एक थे तथा समाज के विषय पर काफी उपन्‍यास और कहानी लिखते थे। मृत्‍यु से पहले प्रेमचंद जी एक भंयकर बीमारी से ग्रस्‍त हो गए जिसके कारण जीवन के अंतिम पलों में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा। प्रेमचंद की मृत्‍यु 8 अक्‍टूबर, 1936 में उत्‍तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हो गई। प्रेमचंद जी के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणा के स्‍त्रोत हैं।

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