Sunday, November 11, 2018

लाल बहादुर शास्‍त्री की जीवनी - Biography of Lal Bahadur Shastri

  Abhimanyu Bhardwaj       Sunday, November 11, 2018
लालबहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) भारत के दूसरे प्रधानमंत्री व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, लालबहादुर शास्त्री बहुत ही सादगी पूर्ण रहने वाले देशभक्त और ईमानदार छवि वाले व्यक्तित्व थे भारत सरकार ने मरणोपरांत इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया था आईये जानते हैं लाल बहादुर शास्‍त्री की जीवनी - Biography of Lal Bahadur Shastri

लाल बहादुर शास्‍त्री की जीवनी - Biography of Lal Bahadur Shastri in Hindi

शास्‍त्री जी का प्रारभिंक जीवन

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्‍त्री का जन्‍म 02 अक्‍टूबर 1904 में मुगलसराय में मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्‍तव के यहॉ हुआ था। शास्‍त्री जी की मॉ का नाम रामदुलारी था। उनके पिता प्राथमिक विद्यालय में एक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे अत: सभी उनको मुंशी जी के नाम से पुकारते थे कुछ दिन शिक्षक के पद पर कार्य करने के बाद उन्‍होंने राजस्‍व विभाग में लिपिक की नौकरी भी की। शास्‍त्री जी अपने परिवार में सबसे छोटे होने के कारण उनके परिवार वाले उनको नन्‍हें के नाम से भी बुलाया करते थे। जब शास्‍त्री जी केवल अठारह माह के थे तभी उनके पिता जी का निधन हो गया और शास्‍त्री जी की मॉ रामदुलारी अपने पिता हजारीलाल के घर मिर्जापुर चली गयीं, लेकिन कुछ समय बाद शास्‍त्री जी ने नाना का भी निधन हो गया उस समय शास्‍त्री जी की परवरिश उनके मौसा रघुनाथ प्रसाद की देखरेख में हुई।

लालबहादुर शास्त्री की शिक्षा

शास्‍त्री जी की प्रारभिंक शिक्षा उनकी ननिहाल में ही हुई तथा उसके बाद की शिक्षा हरिशचन्‍द्र हाई स्‍कूल और काशी विद्यापीठ से ‘शास्‍त्री’ की उपाधि प्राप्‍त की। वर्ष 1928 में इनका विवाह मिर्जापुर के निवासी गणेशप्रसाद जी की पुत्री ललिता से सम्‍पन्‍न हुआ। शास्‍त्री जी की छ: सन्‍तान थीं। 

श्री वास्‍तव से शास्त्री जी 

काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलने के बाद लाल बहादुर जी ने अपना सरनेम श्रीवास्तव हटा दिया और अपने नाम के पीछे शास्त्री लगा लिया और तभी से इनका नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव के बजाय लाल बहादुर शास्त्री पड़ गया

लालबहादुर शास्त्री का राजनीतिक जीवन

जब भारत आजाद हुआ उसके बाद शास्‍त्री जी को उत्‍तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में नियुक्‍त किया गया और उत्‍तर प्रदेश के पहले मुख्‍यमंत्री गोविंद बल्‍लभ पंत के मंत्रिमण्‍डल में शास्‍त्री जी को पुलिस एवं परिवहन मंत्रालय दिया गया। जवाहरलाल नेहरू की मृत्‍यु के पश्‍चात लाल बहादुर शास्‍त्री को 1964 में देश का प्रधानमंत्री नियुक्‍त किया गया। उन्‍होंने 9 जून 1964 में भारत के प्रधानमंत्री की शपथ लेकर पद भार ग्रहण किया। शास्‍त्री जी के शासनकाल में 1965 में पाकिस्‍तान ने भारत पर हमला बोल दिया शास्त्रीजी ने इस युद्ध में राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और जय जवान-जय किसान का नारा दिया। जिसके जवाब में शास्‍त्री जी ने नेतृत्‍व में भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान को करारी शिकस्‍त दी। 

शास्‍त्री जी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले भारत के कई बड़े पदों को ग्रहण किया। जिनमें रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री भी शामिल हैं। लाल बहादुर शास्‍त्री भारत के सबसे सफल प्रधानमंत्रियों में से एक थे वह एक मात्र ऐसे रेल मंत्री रहे जिन्‍होंने रेल दुर्घटना होने के बाद स्‍वयं को दोषी मानते हुए रेल मंत्री के पद से अपना इस्‍तीफा सौप दिया। 

शास्‍त्री जी की मृत्‍यु 11 जनवरी 1966 में ताशकंद समझौते के दौरान उज्‍बेकिस्‍तान में हुई। मरणोंपरात शास्‍त्री जी को भारत का सबसे बड़ा सम्‍मान यानी "भारत रत्‍न" से नवाजा गया। 
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